Thursday, April 16, 2009

रावण वध

हनुमान के साथ जो ज्यादती हुई उससे सीता और रावण को बहुत सहानुभूति थी| इसलिए अब रामलीला में २ गुट बन गए थे एक में राम लक्ष्मण भारत और दिरेक्टोर थे और एक में रावण सीता और हनुमान|

आखिरी दृश्य था रावण मरने वाला था| पूरा मैदान दर्शकों से भरा हुआ था | पैर रखने की भी जगह नहीं थी|

दिरेक्टोर ने सबके पैसे दे दिए थे बस रावण ही बाकी था | सभी ने पहले ही गुटुर गू कर लिया था की मंच पर ही दिरेक्टोर से पैसे मांगने हैं ताकि उसे वही पर लपेटा जाए|

राम-रावण युद्ध | राम के पास ५ तीर हैं .... रावण हस रहा है..हा हा हा हा |

हनुमान राम के पीछे खडा है और उसे धीरे धीरे गालियाँ दे रहा है...."बेटा आज तुझे पता लगेगा | बहुत धर्मात्मा बनता है तेरी सब हेकडी आज निकलेगी|" इधर राम भी उसे खरी खोटी सुनाये जा रहा है "स्साले बंदर की औलाद बहुत फुदकता है...एक दिन तेरा भी अंत आएगा | "

हनुमान ने कनखी मारी और रावण शुरू हो गया..

रघुकुल रीत सदा चली आई जान जाए पर बचन न जाई... तो बेटे राम अब कौन सा बचन लेकर आये हो, सीता तो मेरे साथ है और मैं मरने वाला भी नहीं हूँ...

राम बेचारा मन ही मन गालियाँ देकर रहे गया..पीछे से हनुमान टोंट कास रहा था मार मार......... बड़ा आया है मारने वाला |

राम ने तीर निकाली...प्लास्टिक की तीर थी निशाने पर लगी भी नहीं...आधे में ही गिर गयी...

सारे दर्शक हंसने लगे..राम और दिरेक्टोर की बड़ी बेइज्जती हो रही थी...सभी कह रहे थे अरे ये कलयुगी राम है इससे रावण नहीं मरेगा....

पीछे से दिरेक्टोर ने रावण को कहा ..रावण थोडा नज़दीक चला जा तीर तुझतक नहीं पहुचेगी...रावण ने कहा ह्म्म्म्म |

रावण अपनी जगह से हिला ही नहीं ...हनुमान उसे इशारा कर रहा था नहीं बिलकुल नहीं आज तो इसकी ****** राम ने दूसरा तीर मारा वो भी बीच में ही गिर गया..

पाठको मैं अभी इसे यही बीच में हो छोड़ रहा हूँ....

आपसे निवेदन है की बाकी की कथा बाद में सुनाऊंगा तब तक आपके सुझाव आमंत्रित हैं...चलिए हम सब मिलकर इस भाग को पूरा करते हैं .....

Sunday, April 12, 2009

मेरे मित्र की बीबी

भाग गयी........ बेचारा दोस्त हमेशा चाय पीता रहता था और बीबी से हमेशा चाय बनवाता रहता था ........

तो भाइयो प्लीज़ अब से खुद से चाय बनाना सीख लो |

Saturday, April 11, 2009

हिडिम्बा

बचपन में एक बालहंस में एक कविता पढ़ी थी (कवी आहत) वाले पन्ने पर:

रूप उलटी तवा जैसी

रुक्षभाशिनी कर्कशा तुम

हे हिडिम्बे चार दिन में

कर दिए कैसी दशा तुम |

शादी

मेरी दादी रात भर पड़ोस की शादी में मस्त रही..घर में सभी परेशान की कही उन्होंने इधर उधर का कुछ खा लिया तो बस नयी मुसीबत | सुबह सुबह हमलोगों ने देखा की दादी आराम से धीरे धीरे आ रही हैं...हमलोगों के जान में जान आई |

मैंने पूछा दादी रात भर शादी में रही कैसी थी जोड़ी ?

दादी बोली: भरकुआ, भगवान् ने भी कितनी अच्छी जोड़ी बनायीं है...दोनों एकदम भाई-बहन लग रहे थे |

हुआ हुआ हुआ हुआ ही ही ही ही !!!!

भरकुआ रामायण १

मेरे गाँव में रामलीला शुरू हुई| इस बार का Director बहुत होशियार था और टीवी में काम कर चूका था तो उसे चलते फिरते दृश्य काफी अच्छे लगते थे|

गाँव की इस रामलीला में उसे एक करतब करने का मन सूझा...उसने सोचा की इस बार असली का हनुमान लक्ष्मण को बचाने के लिए हवा में उड़ता हुआ जडी-बूटियां लाएगा..

हनुमान बड़ा मुस्टंड था और उसकी किसी से भी नहीं बनती थी पर कोई बेचारा करे भी तो क्या director भी उससे डरता था कही २-४ हाथ लगा दिया की नानी याद आ जायेगी..

दृश्य: लक्ष्मण मूर्छित है और हनुमान जडी-बूटियाँ लाने जा रहा है..उसके हाथ और पैरों में रस्सियाँ बंधी हैं और उसे बांस के सहारे ऊपर ही ऊपर खींचा जा रहा है जिससे दर्शको को लगे की वो उड़ रहा है...

जो बन्दा रस्सी खींचने वाला था हनुमान उसे बराबर पीटता रहता था सो उसे लगा की अगर वो रस्सी बीच में ही काट देता है तो जनम जनम का बदला वसूल लेगा :) सो जैसे ही हनुमान मंच के बीच में पंहुचा उसने ब्लेड से रस्सी काट दी....हनुमान सीधा राम और लक्ष्मण के बीच में जा गिरा......... मंच पर सभी अचम्भे में कि ये क्या हो गया...राम ने सोचा की स्थिति को सम्हाल लिया जाए सो वो लगातार चिल्लाता रहा हनुमाना जल्दी आओ जडी-बूटी लाओ..इधर हनुमान ही गिरा असली का कराह रहा था...उसका परा सातवे आसमान पर आ गया..और वो शुरू हो गया....साले.... राम... नौटंकी...... जल्दी उठाओ नहीं तो अभी आकर बजा दूंगा ......| राम को भी हनुमान से बदला लेना था सो वो जान-बुझकर हा लक्ष्मण हा लक्ष्मण करता रहा...और इधर हनुमान भी मर गया... बाप रे ......कोई है ...........जल्दी आओ......चिल्लाता रहा | हकीकत में सभी अपना अपना बदला चुका रहे थे...| मंच हाथ से जा चूका था....| अब director ने जल्दी से पर्दा खींचने वाले को कहा (पर्दा खीचने वाला रामलीला में भारत बना हुआ था)......रे भारत जल्दी से पर्दा खींचो नहीं तो बदनामी हो जायेगी.....भारत भी खार खाया हुआ था उसने गलती से आगे वाला पर्दा गिराने क जगह पीछे का उठा दिया....पीछे रावण और सीता साथ में बैठकर बीडी पे रहे थे.... |

डीम-डीम-डीम-डीम ही ही ही |

बोलो वीर हनुमान की जय !!! रामलीला वाले हनुमान कि जय !!!!

भरकुआ विनोद 1

एक पढ़ा लिखा बंद बस से उतरा तो मैंने पूछा: भाइ साहब आपका घर कहा है?

उसने कुछ जवाब नहीं दिया| मैंने फिर से पूछा की भाई साहब घर कहा है? उसने फिर कोई जवाब नहीं दिया |

मैंने फिर पूछा भाई साहब कहा जाना है? इसपर वो झिल्ला गया और बोला: मेरा घर मोतिया है इसका क्या मतलब मुझे मारोगे?

ही ही ही :P

Sunday, March 15, 2009

फंस गए !! हीही

काहे आ गए? का रखा है हमरे ब्लॉग में? इतनी सारी चीज़ें हैं देखने सुनने पढने के लिए और आप हैं की हमरे निजी ब्लॉग में घुसे जा रहे हैं....थोडा शर्म है या वो भी बेच दिए? जाईये अभी बाद में आईयेगा...जहा तहा मुह मारते रहते हैं....जाईये !!