Saturday, April 11, 2009

हिडिम्बा

बचपन में एक बालहंस में एक कविता पढ़ी थी (कवी आहत) वाले पन्ने पर:

रूप उलटी तवा जैसी

रुक्षभाशिनी कर्कशा तुम

हे हिडिम्बे चार दिन में

कर दिए कैसी दशा तुम |

1 comment:

  1. सच में आपने यादें तजा कर दी बालहंस के जमाने की

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