बचपन में एक बालहंस में एक कविता पढ़ी थी (कवी आहत) वाले पन्ने पर:
रूप उलटी तवा जैसी
रुक्षभाशिनी कर्कशा तुम
हे हिडिम्बे चार दिन में
कर दिए कैसी दशा तुम |
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If you think कि आपका भेजा फ्राई हो रहा है तो हमारे पास बड़ा वाला सरकारी heater है बिना तवा के गरमा गरम मिलेगा | आप ऐसा भागेंगे कि फिर कभी नजर नहीं आयेंगे हीही | गोड़धस्सा कॉलेज में हमरी नौकरी लगी है , एक बार हमसे पढ़कर देखिये...दुनिया कि साड़ी पढाई फ़ैल है उसके सामने|
सच में आपने यादें तजा कर दी बालहंस के जमाने की
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