Friday, October 18, 2013

टेढ़ी अंगुली

लिखना एक बुरी चीज़ है 
इससे अंगुलियाँ टेढ़ी हो जाती हैं 
जैसे मेरी
पर मैं तो
पहले से ही टेढ़ा हूँ
मुझसे टेढ़ी होकर 
अंगुलियाँ सीधी हो रही हैं |


Saturday, October 12, 2013

भरकुआ रामलीला: शूर्पनखा काण्ड

भरकुआ रामलीला: शूर्पनखा काण्ड
स्पष्टीकरण: इस कहानी के सारे पत्र एवं सारी घटनाएं रामलीला से inspired हैं और इसमें दिखाई गयी घटना कभी कभी हो जाती हैं... रामलीला एक लोक-कला है और इसका उद्देश्य लोगों का मनोरंजन है और ये कहानी भी उसी तरह की एक मनोरंजन घटना के बारे में है... इसका धर्म या लोगों की धार्मिक भावना से कोई सम्बन्ध नहीं है और न ही किसी की धार्मिक भावना को आहात करने की मंशा है |  
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रामलीला किसी तरह से चल रही थी | इस बार शूर्पनखा का रोल करने के लिए हनुमान की बहन आई हुई थी जो बहुत ही खूबसूरत थी और लक्ष्मण शुरू से ही उससे बात करने की कोशिश कर रहा था लेकिन हनुमान के डर से कर नहीं पा रहा था |
दृश्य: शूर्पनखा राम और लक्ष्मण से विवाह करने का प्रस्ताव रखती है.... पहले वो राम के पास गयी.... शूर्पनखा थोड़ा ज्यादा ही खूबसूरत थी... राम ने किसी तरह दिल पर पत्थर रखकर ना बोला... वो थोड़ा professional कलाकार था.... पर लक्ष्मण से कण्ट्रोल (control) नहीं हुआ.... 
शूर्पनखा लक्ष्मण से: “हे प्रियतम ! मैं जन्म-जन्मान्तर से आपकी आस में बैठी हुई हूँ.. कब से आपसे मिलने के लिए तड़प रही हूँ... इस दुनिया में आपसे अच्छा पति मुझे कोई मिल ही नहीं सकता... कृपा करके आप मुझसे विवाह कर लीजिये.....”
लक्ष्मण के होश उड़ गए... उसे उम्मीद नहीं थी की शूर्पनखा कभी उससे बात भी करेगी... उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था... उसने पूरी मर्दानगी से बोला: “बस जानेमन ! हमारा दिल कहता था की हम दोनों में कोई connection है.... तैयार तो हम उसी दिन से थे जब तुम रामलीला में काम करने आई थी... बस हमें इसी दिन का इंतज़ार था... मां भवानी की कसम, जिस दिन से तुम यहाँ आई हो, उस दिन से हम सो नहीं पाए हैं...... हर वक़्त हर जगह बस तुम ही तुम दिखाई देती हो.....” बोलते-बोलते उसने शूर्पनखा का हाथ पकड़ लिया |
शूर्पनखा को मामला समझ में नहीं आया, वो अपने dialogues बोलती रही: मैंने जब से राम के बारे में आपसे सुना है, तभी से मैंने आपको अपना पति मान लिया है... मैंने ठान लिया है की अगर शादी करुँगी तो आप ही से नहीं तो suicide कर लूंगी |
लक्ष्मण ने पहली बार जिंदगी में किसी से राम की बड़ाई सुनी थी... उसे बहुत आश्चर्य हुआ.. खैर उसने जल्दी से राम को thank you बोला....
तब तक में शूर्पनखा को मामला समझ में आ गया... उसने लक्ष्मण से अपना हाथ छुड़ाते हुए बोला: ये क्या है ? हाथ क्यों पकड़े हो ? हाथ पकड़ने के लिए permission लेना चाहिए न.. किसके permission से हाथ पकड़ लिए.... तुमको पता है न कि मेरा भाई कौन है... जल्दी से छोडो हाथ !!
राम ने लक्ष्मण को धीरे से बोला बोला: बेटा ! ये हनुमान की बहन है... उसे पता चलेगा तो तुझे हर जगह बजरंग बलि दिखाई देंगे |
लक्ष्मण पूरे जोश में था: जिसको आना है आ जाए... आज हम अपने दिल की बात कर के ही रहेंगे....
चारो तरफ से भीड़ चिल्ला रही थी.... कर दे लक्ष्मण... शूर्पनखा को propose कर दे, इससे अच्छा मौका तुझे और कोई नहीं मिलेगा..... लक्ष्मण भी चने के झाड़ पर चढ़ गया... अपने गले की माला से गेंदा का एक फूल निकाला और propose करने के लिए घुटने के बल झुका...... भीड़ चिल्ला रही थी.... कर दे लक्ष्मण... शूर्पनखा को propose कर दे.....
हनुमान स्टेज के पीछे रावण के साथ बीड़ी पी रहा था, कि तभी उसे ये बात सुनाई पड़ी और वो अपना गदा लेकर दौड़ता हुआ स्टेज पर आ गया.... हनुमान को लक्ष्मण की बुरी नजर के बारे में पहले से ही पता था.. वो एक मौका भी खोज रहा था....
शूर्पनखा की बहुत चाहत थी की उसे कोई propose करे... उसके भाई के डर से कोई उसके आस-पास भी नहीं आता था... और फिर इतनी भीड़ के सामने propose होने का एक अलग ही मजा था.... वह ख्यालों में खोयी हुई थी कि उसे स्टेज पर हनुमान आता हुआ दिखाई दिया... उसने तपाक से बोला: अगर हाथ पकड़ना ही चाहते हो तो भैया आ रहे हैं, उनसे permission ले लो... फिर हमलोग साथ में सिनेमा देखने भी चलेंगे....
हनुमान ने आते ही पीछे से लक्ष्मण को एक गदा मारा... उस वक़्त लक्ष्मण propose करने के लिए बस झुका ही था... लक्ष्मण दूर लुढ़क गया... हनुमान ने उसकी धुलाई शुरू कर दी.... उसकी सारी मर्दानगी गायब हो गयी...
तब तक में director आ गया... अरे कोई लक्ष्मण को बचाओ... रावण जल्दी जाओ....
रावण हनुमान का लंगोटिया यार था... वो लक्ष्मण को बचा कैसे सकता था.... न वो खुद स्टेज पर गया और न ही किसी को जाने दे रहा था....
रामलीला रंगा-रंग कार्यक्रम बन गया था... लक्ष्मण पिट रहा था... रावण मस्ती ले रहा था... उसका भाई अंगद जो पर्दा गिराता था उसने भी पर्दा नहीं गिराया..... सूर्पनखा अपना career बचाने और खुद को innocent दिखाने के लिए अपना dialogues “as-it-is” बोले जा रही थी.... राम स्टेज से कूदकर भाग गया.... भीड़ पूरे जोश में और मारो और मारो चिल्ला रही थी.... director ने किसी तरह से पर्दा गिराकर तमाशा बंद किया |
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बोलो वीर हनुमान की जय !! रामलीला वाले हनुमान की जय !!  

Friday, February 26, 2010

भरकुआ और श्राद्ध

भरकुआ जिसे आपमें से सबो ने देखा होगा......एकदम हसमुख लगता है | उसके आगे के ४ दांत हमेशा बाहर की और दीखते हैं| जब वो बच्चा था तब दांत उतने बड़े नहीं थे...जब भी कोई मास्टरजी उसे डांटते थे तो वो सर नहीं उठाता था क्योंकि उसे हमेशा डर लगता था की मास्टर को यह नहीं लगे की वो उसकी डांट को मुस्कुराहटों में टाल रहा है| जब वो बड़ा हो गया तो उसकी पहली नौकरी पहरेदार के रूप में लगी | हर रात वो सोता रहता था अपने घर पर और चोर चोरियां करते थे इसलिए अंत में गाँव वालो ने मिलकर उसे निकाल दिया | जब वो पहरेदार था तब जब भी चोरी होती थी तो उसे गाँव की आमसभा में बुलाया जाता था और वो बेचारा चेहरे पे कपडे बांधकर जाता था एकदम बड़े बड़े क्रिमिनल्स की तरह ताकि कोई उसका चेहरा नहीं देख ले....क्योंकि एक बार गलती से उसने चोरी होने के बाद अपना चेहरा ऊपर किये रखा था और जिसके घर चोरी हुई उसे लगा की भरकुआ उसका मजाक बना रहा है तो उसने उसे पीट दिया.....तब से जब भी चोरी होती थी वो चेहरे पेकपड़ा बांधकर जाता था...

एक बार मुखिया की माँ सीढ़ियों से फिसलकर गिर गयी और महीने भर तक कराहने के बाद मर गयी...वो मुखिया की माँ ही नहीं बड़े मुखिया यानी अभी वाले मुखिया के बाप की बीबी भी थी...सभी काफी दुखी और सहानुभूत थे......सो पूरा पंचायत जमा हुआ था और उस माहौल में भरकुआ मुस्कुराता हुआ पकड़ा गया| गलती से उसे उसी ने देखा जिसने उसे अपने घर में चोरी होने के बाद मुस्कुराते हुए देखा था......उसका गुस्सा चरम पे आ गया और उसने फिर से भरकुआ की जमकर पिटाई कर दी...तब से भरकुआ किसी भी श्राद्ध में नहीं जाता था.........

Thursday, April 16, 2009

रावण वध

हनुमान के साथ जो ज्यादती हुई उससे सीता और रावण को बहुत सहानुभूति थी| इसलिए अब रामलीला में २ गुट बन गए थे एक में राम लक्ष्मण भारत और दिरेक्टोर थे और एक में रावण सीता और हनुमान|

आखिरी दृश्य था रावण मरने वाला था| पूरा मैदान दर्शकों से भरा हुआ था | पैर रखने की भी जगह नहीं थी|

दिरेक्टोर ने सबके पैसे दे दिए थे बस रावण ही बाकी था | सभी ने पहले ही गुटुर गू कर लिया था की मंच पर ही दिरेक्टोर से पैसे मांगने हैं ताकि उसे वही पर लपेटा जाए|

राम-रावण युद्ध | राम के पास ५ तीर हैं .... रावण हस रहा है..हा हा हा हा |

हनुमान राम के पीछे खडा है और उसे धीरे धीरे गालियाँ दे रहा है...."बेटा आज तुझे पता लगेगा | बहुत धर्मात्मा बनता है तेरी सब हेकडी आज निकलेगी|" इधर राम भी उसे खरी खोटी सुनाये जा रहा है "स्साले बंदर की औलाद बहुत फुदकता है...एक दिन तेरा भी अंत आएगा | "

हनुमान ने कनखी मारी और रावण शुरू हो गया..

रघुकुल रीत सदा चली आई जान जाए पर बचन न जाई... तो बेटे राम अब कौन सा बचन लेकर आये हो, सीता तो मेरे साथ है और मैं मरने वाला भी नहीं हूँ...

राम बेचारा मन ही मन गालियाँ देकर रहे गया..पीछे से हनुमान टोंट कास रहा था मार मार......... बड़ा आया है मारने वाला |

राम ने तीर निकाली...प्लास्टिक की तीर थी निशाने पर लगी भी नहीं...आधे में ही गिर गयी...

सारे दर्शक हंसने लगे..राम और दिरेक्टोर की बड़ी बेइज्जती हो रही थी...सभी कह रहे थे अरे ये कलयुगी राम है इससे रावण नहीं मरेगा....

पीछे से दिरेक्टोर ने रावण को कहा ..रावण थोडा नज़दीक चला जा तीर तुझतक नहीं पहुचेगी...रावण ने कहा ह्म्म्म्म |

रावण अपनी जगह से हिला ही नहीं ...हनुमान उसे इशारा कर रहा था नहीं बिलकुल नहीं आज तो इसकी ****** राम ने दूसरा तीर मारा वो भी बीच में ही गिर गया..

पाठको मैं अभी इसे यही बीच में हो छोड़ रहा हूँ....

आपसे निवेदन है की बाकी की कथा बाद में सुनाऊंगा तब तक आपके सुझाव आमंत्रित हैं...चलिए हम सब मिलकर इस भाग को पूरा करते हैं .....

Sunday, April 12, 2009

मेरे मित्र की बीबी

भाग गयी........ बेचारा दोस्त हमेशा चाय पीता रहता था और बीबी से हमेशा चाय बनवाता रहता था ........

तो भाइयो प्लीज़ अब से खुद से चाय बनाना सीख लो |

Saturday, April 11, 2009

हिडिम्बा

बचपन में एक बालहंस में एक कविता पढ़ी थी (कवी आहत) वाले पन्ने पर:

रूप उलटी तवा जैसी

रुक्षभाशिनी कर्कशा तुम

हे हिडिम्बे चार दिन में

कर दिए कैसी दशा तुम |

शादी

मेरी दादी रात भर पड़ोस की शादी में मस्त रही..घर में सभी परेशान की कही उन्होंने इधर उधर का कुछ खा लिया तो बस नयी मुसीबत | सुबह सुबह हमलोगों ने देखा की दादी आराम से धीरे धीरे आ रही हैं...हमलोगों के जान में जान आई |

मैंने पूछा दादी रात भर शादी में रही कैसी थी जोड़ी ?

दादी बोली: भरकुआ, भगवान् ने भी कितनी अच्छी जोड़ी बनायीं है...दोनों एकदम भाई-बहन लग रहे थे |

हुआ हुआ हुआ हुआ ही ही ही ही !!!!